FROM THE PEN OF THE PRINCIPAL

स्नेहिल  विद्यार्थियो………………
ज़िंदगी रोज बदलती है | यहां एक क्षण को भी कुछ स्थिर नहीं, यहाँ सब धारा है ,यहाँ सब बह रहा है, यहाँ सब बदल रहा है | कल तुमने जो तय किया था वह आज काम नहीं आता, आज जो तुम अनुभव करोगे वह कल काम में नहीं आएगा इसलिए भीतर ज्ञान के दीपक को उजागर रखिए | अभी हाल ही में आपने स्कूली शिक्षा का एक पड़ाव पार किया और आप अपने अगले पड़ाव की ओर बढ़ने का साहस व हौंसला फिर से बटोर रहे हैं | आप का एक सही निर्णय आप की मंजिलों की ओर बढ़ते कदमों को रफ्तार दे सकता है | शिक्षा वो ज़रिया है जो विद्यार्थी के मानसपटल पर उमरे रमणीय सपनों को साकार बनाती है, कल्पना को उड़ान देती है और विद्यार्थी में बहुत कुछ ओर सीखने की ललक पैदा करती है उसे प्रशिक्षित व प्रतिष्ठित बना कर उसके नाम व पहचान को उभारती है| देव समाज संस्था के संस्थापक भगवान देवात्मा जी ने नारी शिक्षा को बढ़ावा देकर समाज में नारी को एक बुलंद व उम्दा ओहदा देकर सदियों की संकीर्ण  सोच को उदार व गहरी सोच में बदला | आज के बदलते हुए दौर में नारी ने हर क्षेत्र में खुद को साबित करके अपनी कामयाबी का झंडा गाड़ा | आज भारतीय सेना बल में फाइटर पायलट के रूप में कुमारी मोहना, कुमारी अन्नवी, कुमारी भावना ने नारी सशक्तिकरण की नई परिभाषा लिख डाली | ओलम्पिक खेलों में भी पी. वी. संधू , दीपा कालेकर, साक्षी मलिक , मैरीकॉम व सानिया नहेवाल जैसी खिलाडियों ने महिलाओं के लिए नई राहें बनाई और अब तो और भी फ़ख़्र की बात है कि  न्यायिक क्षेत्र में आज  चार राज्यों की हाईकोर्ट में मुख्य न्यायधीश के पदों को काबिल महिलाओं ने संभाला हुआ है| मद्रास में इंदिरा बैनर्जी , बंबई में मंजुला सिल्लर, दिल्ली में जी. रोहिणी, कोलकाता में निष्ठा निर्मल मैत्रीय जैसी नारीयों ने नई क्षितिज के द्वार खोले |

 

प्यारे विद्यार्थियो! जीवन चुनौतियों और मुश्किलों से भरा है मगर  जीवन को आसान बनाना हमारे बस में है | सूर्य की अनुपस्थिति में केवल एक दीपक के प्रयास से रोशनी सम्भव है | आपकी सोच में दम होना चाहिए , चमक होनी चाहिए | आप मन में कुछ कर गुजरने का संकल्प करें ओर मन में ज्ञान का दीप जलाएं, यही मेरा संदेश है| यही मेरी अभिलाषा    है|
अनेको शुभ भावनाएं व शुभ कामनाएँ|


                                               अपने घरोंदे तू बना , तट है बड़ा रेता घना
                                               संसार भी तो देख ले – रमणीय तेरी कल्पना
                                               संघर्ष कर, संघर्ष कर, संघर्ष कर|

I look forward to welcoming you!

Ms. Renu Gupta (Principal)